मेरे सपनो का शहर जबलपुर

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आज बीस साल बाद मेरा USA से जबलपुर आना हो रहा था. पुराने दिनों को याद करते हुये मै जैसे ही ट्रेन से उतरा, मेरी नज़र एक बोर्ड पर गई, जहा लिखा था, यह स्टेशन गूगल wifi powered है. स्टेशन पर नज़र गई तो इतना साफ़ सुथरा की अपनी सकल फर्श मे देख लो. स्टेशन से बाहर आ कर देखा तो सारे ऑटो, स्टैंड पर लगे थे और यह क्या सारे ऑटो बैटरी से चलने वाले थे और पेडल रिक्सा भी बैटरी रिक्सा मे कन्वर्ट हो गये थे. तो मैने प्री पेड ऑटो बूथ से पर्ची कटाई और पेडल रिक्सा कर लिया. जब मैने उससे पुछा की भाई यह सब रिक्सा बैटरी मे कैसे बदल गये ? तो उसने बताया की नगर निगम ने सबको अनुदान दिया और शहर के अन्दर पेट्रोल एंड डीजल से चलने वाले ऑटो बंद हो गए है. जब वो मुझे मालगौदाम रोड से ले जाने लगा तो मैने वोला की दूसरी और ले चलो सो उसने कहा के सर यह रिंग रोड हो गया है. यह रोड बाहर जाने का और दूसरा आने का. यह क्या मालगौदाम रोड की तो शकल ही बदल गई. इतनी चोडी और साफ़ सुथरी रोड तो मैने कभी सोची ही नहीं थी.

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ख़ैर जैसे ही हम मुख्य रोड पर आये तो देखा, रोड अब 6 लेन की है, साइकिल और पेदल चलने के लिये अलग से इंतजाम है और हर जगह CCTV लगे हुये है, जिससे सारे शहर का ट्रैफिक और लॉ कण्ट्रोल होता है. यह देख मुझे थोडा आश्चर्य हुआ, मैने रिक्से वाले से शहर के बारे मे थोडा बताने को कहा. उसने कहा

  1. हर 1 K.M. पर सुलभ शोचालय बना हुये है.
  2. हर गवर्मेंट एंड कॉर्पोरेट ऑफिस को जहा स्टाफ ५० से उपर है, अपना ३०% बिजली सोलर से बनाना है.
  3. हर बिल्डिंग मे रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य है.

मुजे सुनकर अच्छा लगा. जब मे कलेक्ट्रेट ऑफिस के सामने से गुजरा तो देखा छत पर सोलर पैनल लगे हुए है और भीड़ भी कम लगी, मैने रिक्से वाले से पुछा की आज छुट्टी है क्या ? उसने कहा, नहीं साब, सारा काम ऑनलाइन होता है आजकल.

रास्ते मे मैने एक मिठाई की दुकान से मिठाई ली, जब मैने उसको कैर्री बैग मागा तो उसने कागज का बैग दिया और बोला की जबलपुर पोल्य्थीन फ्री शहर है J. रास्ते मे मुझको कोई भी आवारा जानवर रोड पर नहीं दिखा, तो रिक्शे वाले ने बोला, नगरनिगम पकडे गए दुधारो पशूओ को मुफ्त मे BPL लोगो को दे देता है. बाकियों को गोशाला मे भेज दिया जाता है.

जब मै घर पंहुचा तो देखा मेरी कॉलोनी काफी साफ़ सुथरी है और हरयाली भी ज्यादा है. मैने पापा से पुछा, यह चमत्कार कैसे ? पापा ने बताया की एको-फ्रेंडली कॉलोनी के रहवाशियो को प्रॉपर्टी टैक्स मे ३० से ५० % की छूट है. मैने अपने घर मे भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग देखा, तो पापा हँस कर बोले, इससे हम जल स्तर मेंटन करते है साथ मे जलकर मे २०% का छूट है. मैने कहा आप स्मार्ट पापा हो J, वो बोले जबलपुर स्मार्ट हो गया है.

सुबह जब मे उठा तो देखा नगरनिगम की कचरा गाड़ी डोर तो डोर कचरा कलेक्ट कर रही थी. री-साइकिल और जनरल कचरा अलग अलग रखा जा रहा था. पापा ने बोला की यहाँ पर वर्ल्ड क्लास waste मैनेजमेंट है और कचरे से बिजली एवं खाद बनाई जाती है. गंदे पानी का ट्रीटमेंट होने के बाद ही नदी मे छोड़ा जाता है.

अगले दिन सुबह हमको अपने फार्म हाउस जाना था, मैने बोला की वहा इंटरनेट नहीं होगा तो पापा ने बोला की भाई आजकल गाव गाव wifi स्पॉट्स है, तो चलो. हम जब फॉर्म हाउस पुहुचे तो मुजसे मिलने काफी लोग आये और बोले के रेडियो से पता चला की आप आये है. मैने पापा से पुछा अब इसकी क्या जरूत थी. पापा बोले, भाई अब हर जनपद का अपना FM है और हर छोटी चीज की भी जानकारी सबको पता चल जाती है. खाना खाने के बाद पापा ने हमको एक सड़क दिखाई जो दादा जी के नाम पर थी, इससे पहले मै कुछ पूछता, वो वोले की कोई व्यक्ती किसी भी सड़क डेवलपमेंट का ७०% या आधिक का खर्चा वहन करता है तो वो रोड उसके या उसके किसी प्रिय के नाम पर अगले ५ साल तक कर दी जाती है. उसके बाद हम एक स्कूल पहुचें जो अब हायर सेकेंडरी हो गया था .. मैने पापा से पुछा यहाँ टीचर है? पापा हसते हुए बोले की सारी टेक्नोलॉजी का ठेका तुम US वालो ने ले कर रखा है क्या. यहाँ पर वर्चुअल क्लास के द्वारा मैथस भोपाल का टीचर, तो साइंस, जबलपुर का टीचर पड़ा रहा है और ऐसा सभी गाँवों मे हो रहा है. मैं अवाक् था यह सब देख कर.

शाम को जब हम घर जाने के लिये वापस मुडे तो पापा ने गाड़ी कमानिया गेट से ले जाने को कहा. मैने बोला बहूत भीड़ होगी, पापा बोले चलो तो. जैसे ही हम मालविया चोंक पहुचे तो पापा ने बोला की यहाँ से गोहलपुर तक सड़क one वे है और छोटे छोटे रिंग रोड है, जो आपको U टर्न कराते है. सारे शहर मे इलेक्ट्रिक वायर और नालियाँ अंडरग्राउंड है और स्ट्रीट लाइट सोलर पॉवर से चलती है. फिर हम सब्जी मंडी गए, जहा हमने गाड़ी multi लेवल पार्किंग मे पार्क की और जब मंडी पहचे तो देखा वो भी अभी multi लेवल मंडी है. कम जगह का अछा उपयोग था. पापा ने बताया हर एरिया मे ऐसे ही multi लेवल मंडी और पार्किंग है, जिसके कारण रोड के किनारे पुराने जैसे वेंडर नहीं मिलते है.

वापस घर आते समय मैने देखा, सारी सिटी बस बैटरी से चल रही थी और मैंन रोड पर BRT सर्विसेस थी. जिससे सफ़र जल्दी और आसान था.

यह सब देख कर लगा की जबलपुर वाकई मे स्मार्ट हो गया है और यह सोचते सोचते कब मेरी आखं लग गई पता ही नहीं चला .. सुबह उठा तो देखा मेरी बेटी मुझसे बोल रही थी ..पापा उठो और जल्दी से तईयार हो जाओ इंडिया नहीं चलना है क्या …? तभी मुझे लगा की मै तो सपना देख रहा था .. पर जो भी था .. अच्छा था.

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